Sunday, 29 March 2015

tanu Thadani तनु थदानी करोगी दोस्ती मेरी खामोशी से

मेरी खामोशी है मेला कुंभ का ,
जहां बहुत कुछ छूट जाता है,खो जाता है !




मेरी खामोशी है धरातल चाँद का ,
जहां नहीं है गुरुत्वाकर्षण !
जब कभी उतरता हूँ
अपनी खामोशी में,
हो जाता हूँ वजनहीन ,
गोया भार कहीं सो जाता है !




मेरी खामोशी है फुटपाथ,
पूरी चहलक़दमी,
नहीं ठहरता है कोई,
न ही कोई किसी का हो पाता है !




करोगी दोस्ती मेरी खामोशी से ?
शर्त है ; ढेरों बातें करनी होंगी !
मैं कभी चुप नहीं रहता अपनी खामोशी में ;
मगर देखो ना ;
हर वो हो जाता है निरंतर चुप ;
जो मेरी खामोशी में उतर दाखिल हो जाता है !!







Monday, 23 March 2015

tanu thadani तनु थदानी यह कोई कविता नहीं है

बूंद बूंद कथानकों में
फंसती हैं जीवित कथाऐं !

जब मात्र कमाने के लिए पढ़ते हैं बच्चे,
पढ़ लिख कर कमाते हैं सिर्फ पैसे,
घुटने टेकती है उम्र तब पैसों के आगे,
अनवरत बहते जीवन पर ,
तैरती रहती हैं व्यथायें !

कभी आना मिलना अपने सूखे से दिल से,
कभी बतियाना अपने ख्वाबों से ,
थोड़ी सी खुशियाँ भी कमाना ,
कभी माँ के पास भी आना ,
इससे पहले कि माँ कहीं गुम हो जाये ,
इससे पहले कि कोई तुमसे सहानुभूति जताये !

ये कोई कविता नहीं है
नहीं है कोई कथा ,
विवशता लिखी है परदेशी की ,
सूत्रधार अचंभित है,क्या छोड़े ?क्या बताये??
----------------- तनु थदानी