Friday, 24 April 2015

tanu thadani तनु थदानी हम और तुम

फिर मिलेंगे
कहते हैं विदा होने से पहले
कितने आशावान हैं हम और तुम !


बेवकूफियों के अस्तर लगी जिंदगी जीते हैं ;
कल का नहीं पता
मगर अगले कई सालों की रूपरेखा में हैं उलझे ;
हरे से लाल हैं होते
कि जैसे पान हैं हम और तुम !


हमारे जिस्म के भूगोल का
इतिहास बनने का गणित
पूरा दर्शन शास्त्र है !
घड़ियां तो आईना होती हैं
टिक टिक कह कह
नहीं टिकती हैं खुद
न देती हैं टिकने ;
बताती हैं -
इसी परिपथ में घूमना ही जीवन मात्र है  !
तुम मुझमें
मैं उतरता हूँ तुझमें
खोजते हैं जीने को प्यार के पल ;
कैसे मान लू्ं कि मात्र सांसों की खान हैं हम और तुम !!

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